रोटी-रोटी के लाले, इसलिए कर रहे हैं पलायन

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रेलवे स्टेशन में आज सुबह फिर ओडि़शा के मजदूर बड़ी संख्या में सहपरिवार पलायन करने पहुंचे। सभी नागपुर होते हुए हैदराबाद जाएंगे। चर्चा में कुछ लोगों ने बताया कि खेती-बाड़ी में काफी नुकसान हुआ है तथा स्थानीय क्षेत्र में रोजी-रोटी की समस्या से जुझना पड़ता है इसलिए सभी हैदराबाद में ईंटभट्टा में काम करने जा रहे हैं। अगले 6 माह तक सभी हैदराबाद के अलग-अलग जगहों पर काम करेंगे। पता चला कि प्रति व्यक्ति 20 हजार रूपए में सौदा होता है। इस सौदे के तहत् खाने रहने की सुविधा सभी को दी जाती है और सप्ताह में प्रति परिवार 600 रूपए कार्य के एवज में दिए जाते हैं।
विगत माह से लगातार मजदूर पलायन कर रहे हैं। रोजी-रोटी की समस्या से जूझता ये मजदूर परिवार बाहर कमाने-खाने जा रहे हैं। विगत दिनों छत्तीसगढ़ के मजदूरों के पलायन के दौरान राजधानी के रेलवे स्टेशन में शासकीय रेलवे पुलिस ने ठेकेदार को पकड़ा था। जांच के बाद कार्यवाही भी हुई थी जिसके बाद से छत्तीसगढ़ के मजदूरों के पलायन में एक तरह से रोक लग गई परंतु पिछले पखवाड़े भर से ओडि़शा के मजदूरों का पलायन राजधानी के स्टेशन से हो रहा है।
गौरतलब है कि दो दिन पूर्व भी ओडि़शा के मजदूर ट्रेन संख्या 12994 पुरी-गांधीधाम सुपर फास्ट से नागपुर तक जाने रवाना हुए थे, वे लोग आगे दूसरी ट्रेन से हैदराबाद के लिए रवाना हुए। इसी तरह आज ओडि़शा से लगभग 200 से 250 मजदूर लिंक एक्सप्रेस से रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे तथा ट्रेन संख्या 12849 बिलासपुर-पूणे सुपर फास्ट एक्सप्रेस से नागपुर के लिए रवाना हुए। चर्चा में पता चला कि सभी नागपुर से ट्रेन बदलकर आगे हैदराबाद के लिए रवाना होंगे। चर्चा में बलांगीर जिले के कुछ मजदूरों ने नाम तो नहीं बताया लेकिन वीएनएस संवाददाता को ईंटभट्टा में कार्य करने की पूरी प्रक्रिया बता दिए। उन्होंने बताया कि सभी ओडि़शा के कांटाबांजी स्टेशन से एक साथ चढ़े थे। उपस्थित अन्य मजदूरों के बारे में पता चला कि सभी अलग-अलग जिला बलांगीर, तितलागढ़, कांटाबांजी, हरिशंकर आदि जगहों से हैं। बताया गया कि 20 हजार प्रति व्यक्ति पहले ही दिया जाता है। सभी 6 माह तक हैदराबाद के ईंटभ_ों में काम करेंगे। रोजमर्रा के सामान ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं।
रेलवे स्टेशन में हर बार की तरह लापरवाही भी देखने को मिली। इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों के रेलवे स्टेशन पर मौजूद होने के बावजूद कोई भी टीटीई तथा पुलिस स्टाफ ने पूछताछ करना जरूरी नहीं समझा। शासकीय रेलवे पुलिस को यह बात तो पता रहती है कि सभी ओडि़शा के मजदूर हैं लेकिन जांच नहीं की जा रही है। जीआरपी प्रभारी आर.बोर्झा से जब इस मामले की जानकारी चाही गई तो वे बताने में असमर्थ दिखे। आनन-फानन उन्होंने स्टेशन ड्यूटी में तैनात सिपाही से जानकारी चाही परंतु उन्हें भी इस संबंध में किसी प्रकार से जानकारी नहीं थी जबकि कुछ दिन पहले बोर्झा ने स्टेशन ड्यूटी में तैनात अपने सिपाहियों को पलायन कर रहे मजदूरों की जानकारी रजिस्टर में दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मजदूरों का नाम-पता दर्ज करना तो दूर थाने में सूचना देना भी जीआरपी के सिपाही जरूरी नहीं समझते हैं। ट्रेन आने के घंटों पहले प्लेटफार्म पर बैठे इन ओडि़शा के मजदूरों पर जीआरपी के सिपाहियों की नजर तक नहीं जाती और तो और कोई टीटीई तथा आरपीएफ के सिपाही टिकिट जांच करना भी उचित नहीं समझते। बहरहाल जीआरपी प्रभारी ने आनन-फानन जानकारी जुटाने सिपाहियों को जरूर भेजा था।

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