कई देशों में पूरी तरह से बैन है बुर्का, शिवसेना की मांग के बाद भारत में भी इसको लेकर बहस शुरू

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महिलाओं के बुर्का पहनने पर जहां शिवसेना की पहल के बाद बहस शुरू हो गई है वहीं दूसरी तरफ इस मांग का विरोध होना भी तय माना जा रहा है। इसका विरोध करने वाले शिवेसेना की मांग को कट्टरवादी सोच और सियासी फायदा करार दे सकते हैं, लेकिन इसके बाद भी यह सवाल काफी बड़ा है, जिसका जवाब तलाशना भी बेहद जरूरी है। जहां तक शिवसेना की बात है तो वह इससे पहले भी इस तरह की मांग कर चुकी है। लेकिन अब इसकी शुरुआत श्रीलंका से हुई है। दरअसल, श्रीलंका में आतंकी हमले के बाद वहां की सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद ही शिवसेना ने भारत में इसको बैन करने की मांग की है। इतना ही नहीं दुनिया के कई देश जिसमें यूरोपीय देश ज्‍यादा है ने बुर्का प्रतिबंधित किया हुआ है।

डेनमार्क जहां 2018 में इसको प्रतिबंधित किया गया। इसके अलावा फ्रांस में 2011 में इसे प्रतिबंधित किया गया। यहां पर सार्वजनिक स्‍थलों पर बुर्का पहने पर 150 यूरो का जुर्माना लगाया जा सकता है। जबरन बुर्का पहनाने पर यहां 30 हजार यूरो का जुर्माना है। इसी तरह बेल्जियम में भी 2011 में ही इसको बैन किया गया और ऐसा न करने पर सात दिन की जेल या 1300 यूरो तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया। 2015 में नीदरलैंड्स और हॉलैंड में सार्वजनिक स्‍थलों पर इसे पहनना प्रतिबंधित किया गया। स्विट्जरलैंड के टेसिन इलाके में 2016 में इसको प्रतिबंधित किया गया। इस आदेश का उल्‍लंघन करने पर यहां 9200 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इटली के नोवारा में वर्ष 2010 में इसको बैन किया गया। जर्मनी में 2017 में इस पर रोक लगाई गई। स्पेन के कैटेलोनिया इलाके में 2013 से ही यह प्रतिबंधित है। 2013 तक तुर्की में बुर्का या हिजाब पहनने पर रोक थी, लेकिन बाद में इसको हटा लिया गया। लेकिन आज भी अदालत, सेना और पुलिस में महिलाएं बुर्का पहनकर नहीं जा सकती हैं। चाड में 2018 में इसको प्रतिबंधित किया गया। यहां पर सार्वजनिक स्‍थलों पर बुर्का पहनने पर जुर्माना और जेल का प्रावधान है। कैमरून के पांच राज्‍यों में भी 2018 में इसको प्रतिबंध्रित किया गया। कोंगो में 2015 में इसको बैन किया गया।

अब आपको उन तमाम लिबास के बारे में भी बता दें कि जिसको मुस्लिम महिलाएं शरीर ढकने के लिए इस्‍तेमाल करती हैं।

शायला
खाड़ी देशों में अधिक लोकप्रिय शायला एक चोकोर स्कार्फ होता है जिससे सिर और बालों को ढंका जाता है। इसके दोनों सिरे कंधों पर लटके रहते हैं। आम तौर पर इसमें गला दिखता रहता है।

हिजाब
इसमें बाल, कान, गला और छाती के अलावा कंधों का भी कुछ हिस्सा ढका होता है, लेकिन इसमें चेहरा दिखाई देता है। दुनिया भर में मुस्लिम महिलाओं में इसका प्रचलन काफी देखा जाता है।

अल अमीरा
यह एक डबल स्कार्फ होता है जिसके एक हिस्‍से से सिर को पूरी तरह से ढका जाता है, जबकि दूसरा हिस्‍सा कंधों से होते हुए कुछ नीचे तक आता है। अरब देशों में यह काफी लोकप्रिय है।

चिमार
यह काफी लंबा होता है जिसमें चेहरा दिखता रहता है, लेकिन सिर, कंधें, छाती और आधी बाहों तक शरीर पूरी तरह ढंका हुआ होता है।

चादर
इसमें चेहरे को छोड़ कर आधे से ज्‍यादा शरीर को ढका जाता है। ईरान में यह खासा लोकप्रिय है। इसमें भी सिर पर अलग से स्कार्फ पहना जाता है।

नकाब
इसमें पूरा चेहरा ढका जाता है और महिला की सिर्फ आंखें ही दिखाई देती हैं। अकसर लंबे काले गाउन के साथ इसको पहना जाता है। उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में इसका प्रचलन ज्‍यादा दिखाई देता है।

बुर्का 
यह पूरा शरीर ढकने के‍ लिए पहना जाता है। इसमें आंखों के आगे एक जालीनुमा कपड़ा होता है। भारत समेत कई देशों में इसका प्रचलन दिखाई देता है।

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