अपने परिवार को बचाने के लिए बना डाला था बंकर, फिर ऐसे खड़ी की भारत की सबसे बड़ी फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी

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राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को आम बजट सत्र की शुरुआत से पहले संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया. राष्‍ट्रपति ने इकोनॉमिक सर्वे से पहले सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा पेश किया. इस दौरान राष्‍ट्रपति ने हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (एचएएल) का जिक्र किया. उन्‍होंने बताया कि कैसे पिछले दिनों सरकार ने भारतीय वायुसेना (आईएएफ) को ताकतवर करने के लिए एचएएल निर्मित लाइट कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट तेजस की खरीद को मंजूरी दी है.

एचएएल देश की वह कंपनी है जो पिछले कई दशकों से सेनाओं को मजबूत करने में लगी हुई है. आज सेनाओं के लिए हेलीकॉप्‍टर और फाइटर जेट्स बनाने वाली एचएएल की शुरुआत भी कम दिलचस्‍प नहीं है. गुजरात के रहने वाले वालचंद हीराचंद ने दोषी ने एचएएल की शुरुआत की थी. उन्‍हें आज भारतीय ट्रांसपोर्ट इंडस्‍ट्री का पितामह कहा जाता है.

फैमिली के लिए तैयार कर डाला बंकर

देश की ट्रांसपोर्ट इंडस्‍ट्री की पहचान बन चुकी फिएट की कार पद्मिनी का निर्माण वालचंद ग्रुप की फिएट डिविजन में ही होता था. वालचंद ने प्रथम विश्‍व युद्ध के बाद अपना करियर शुरू किया था लेकिन जब द्वितीय विश्‍व युद्ध अपने चरम पर था तो व‍ह अपने परिवार को लेकर चिंतित हो गए थे. उसी समय उन्‍होंने अपने मुंबई के बीचों-बीच अपने परिवार की सुरक्षा के लिए एक ऐसे बंकर का निर्माण कराया जिसके बाद जापान की तरफ से होने वाले हवाई हमले या बमबारी उनके परिवार को छू भी नहीं सकती थी. आज यह बंकर उस दौर का प्रतीक बन चुका है जब ताकतवर उद्यमी भी अपनी जिंदगी को लेकर निश्चिंत नहीं थे. हालांकि अब इसे भूला दिया गया है.

मुंबई से लंदन की जहाज यात्रा

गुजराती मूल के वालचंद महाराष्‍ट्र के शोलापुर की बिजनेस फैमिली से आते थे. उनके परिवार का बैंकिंग और कपास का उद्योग था. लेकिन साल 1908 में वालचंद ने वालचंद इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड के साथ कंस्‍ट्रक्‍शन का बिजनेस शुरू किया. उनकी इंडस्‍ट्रीज का सबसे पहला प्रोजेक्‍ट एक रेलवे टनल थी जिसे सहयाद्रि या भोर घाट्स पर निर्मित किया गया था और यह जगह मुंबई और पुणे को अलग करती है.

साल 1919 में उन्‍होंने ग्‍वालियर के सिंधिया घराने से एसएस लॉयल्‍टी की स्‍टीमर शिप को खरीदा था. 5 अप्रैल 1919 को वह अपने जहाज पर पहली अंतरराष्‍ट्रीय यात्रा पर निकले थे. आज भी इस दिन को देश में नेशनल मैरिटाइम डे के तौर पर मनाया जाता है. वह मुंबई से लंदन गए थे और यह दिन इसलिए भी अहम बन गया क्‍योंकि ज्‍यादातर समुद्री रास्‍तों पर अंग्रेजों का नियंत्रण था.

जहाज, कार और एयरक्राफ्ट की फैक्ट्रियां

इसके बाद उन्‍होंने भारत की पहले स्‍वदेशी शिपिंग कंपनी सिंधिया शिपयार्ड की नींव रखी थी. सिंधिया शिपयार्ड का नाम बदलकर सन् 1940 में हिन्‍दुस्‍तान शिपयार्ड लिमिटेड कर दिया गया था और यह विशाखापट्टनम में है. इस शिपयार्ड ने आजादी के बाद देश का पहला जहाज निर्मित किया. सन् 1948 में निर्मित जहाज का नाम जल ऊषा रखा गया था. इसके साथ ही वालचंद ने एचएएल और साथ ही साथ प्रीमियर ऑटोमोबाइल्‍स को भी शुरू किया, जो देश की पहली स्‍वदेशी ऑटोमोबाइल कंपनी थी. वालचंद ने पाइप बनाने वाली फैक्‍ट्री का निर्माण शुरू किया. एचएएल को जब शुरू किया गया तो इसका नाम हिन्‍दुस्‍तान एयरक्राफ्ट था और इसकी नींव बेंगलुरु में डाली गई थी.

जब आया पहला एयरक्राफ्ट

सन् 1941 में देश का पहला एयरक्राफ्ट हर्लो तैयार हुआ और यह एक ट्रेनर एयरक्राफ्ट था. एचएएल की नींव डोमलुर में विलियम डी पॉवले ने रखी थी. पॉवले न्‍यूयॉर्क स्थित इंटरकॉन्टिनेंटल एयक्राफ्ट कॉरपोरेशन के मालिक थे. पॉवले ही अमेरिका से बड़ी संख्‍या में औजार और उपकरण लेकर आए थे. अप्रैल 1941 में भारत सरकार ने 25 लाख रुपए निवेश करके कंपनी के तिहाई शेयर्स खरीद लिए थे.

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह थी कि ब्रिटिश सरकार एशिया में भारी संख्‍या में ब्रिटिश मिलिट्री हार्डवेयर सप्‍लाई करना चाहती थी. द्वितीय विश्‍व युद्ध के दौरान जापान के बढ़ते प्रभाव को कमजोर करने के लिए ब्रिटिश सरकार ऐसा करना चाहती थी. मैसूर के शाही परिवार की तरफ से दो डायरेक्‍टर्स भेजे गए, एयर मार्शल जॉन हिगिंग्‍स एचएएल के पहले रेजीडेंट डायरेक्‍टर थे.

एचएएल ने तैयार किया पहला फाइटर जेट

2 अप्रैल 1942 को सरकार ने ऐलान किया था कि कंपनी का राष्‍ट्रीयकरण किया जा रहा है. मैसूर के शाही परिवार की तरफ से कंपनी में अपने शेयर्स बेचने से साफ इनकार कर दिया गया था. सन. 1954 में हिन्‍दुस्‍तान एयरक्राफ्ट की तरफ 158 ब्रॉड गेज कोच तैयार किए गए थे. 1943 में एचएएल की बेंगलुरु फैक्‍ट्री को अमेरिकी एयरफोर्स को सौंप दिया गया था.

आजादी के बाद 1 अक्‍टूबर 1964 को हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (एचएएल) का गठन किया गया. इसी वर्ष जून में कानपुर में आईएएफ एयरक्राफ्ट मैन्‍युफैक्‍चर की तरफ से मिग-21 को तैयार करने की शुरुआत हुई. कानपुर के अलावा कोरापुट, नासिक और हैदराबाद में भी फैक्ट्रिया शुरू हुई. सन् 1960 में एचएएल ने पहला देसी जेट मारुत तैयार किया था.

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