छत्तीसगढ़-विशाखापट्टनम रूट खुलने में 4 दिन और लगेंगे, ट्रैक से 300 मजदूर हटा रहे मलबा, 14 दिन से 5 ट्रेनें और 30 मालगाड़ियां रद्द

छत्तीसगढ़-विशाखापट्टनम रेलवे रूट 4 दिन और बंद रहेगा. लैंडस्लाइड के 14 दिन बाद भी पटरी से मलबा नहीं हटाया जा सका है. जिसके चलते 12 अक्टूबर तक 5 यात्री ट्रेनें और 30 मालगाड़ियां रद्द रहेंगी. दरअसल, ओडिशा के मनाबार और जरती रेलवे स्टेशन के बीच केके (किरंदुल-कोत्तावालसा) रेलवे लाइन पर 24 सितंबर को लैंडस्लाइड हुआ था. बारिश की वजह से काम करने में दिक्कत हो रही है.

पटरियों पर करीब 10 हजार टन से ज्यादा मलबा जमा है. जिसे हटाने के लिए 25 से ज्यादा पोकलेन और JCB मशीनों के साथ 300 से ज्यादा मजदूर लगे हैं. रेलवे प्रशासन 12 अक्टूबर तक रूट बहाल करने का दावा कर रहा है.

वाल्टेयर रेलखंड के सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर एके त्रिपाठी ने बताया कि कुछ ट्रेनें कोरापुट तक आएंगी और यहीं से लौट जाएंगी. इनमें किरंदुल-विशाखापट्टनम पैसेंजर, नाइट एक्सप्रेस, समलेश्वरी एक्सप्रेस, राउरकेला-जगदलपुर एक्सप्रेस, हीराखंड एक्सप्रेस शामिल है. 24 सितंबर से ही सभी ट्रेनें छत्तीसगढ़ नहीं पहुंच पा रही हैं.

वहीं हर दिन किरंदुल से आयरन लेकर जाने वाली करीब 30 मालगाड़ियों की आवाजाही भी बंद है. रेलवे के अफसरों का कहना है कि जब तक मार्ग पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाता, तब तक ट्रेनों को रद्द किया गया है. ऐसे में NMDC और रेलवे को करोड़ों रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा है.

किरंदुल-विशाखापट्टनम ट्रेन से हर दिन सैकड़ों लोग बस्तर से विशाखापट्टनम जाते हैं. ज्यादातर लोग मेडिकल से जुड़े कामों की वजह से ट्रेन से यात्रा करते हैं. अब ट्रेनें बंद होने की वजह से यात्रियों को सड़क मार्ग से विशाखापट्टनम जाना पड़ रहा है. यात्री बसों में किराया ज्यादा होने की वजह से लोग परेशान हो रहे हैं. वहीं, टैक्सी या फिर बुकिंग एजेंट भी ज्यादा किराया वसूल कर रहे हैं.

किरंदुल-कोत्तावालसा रेललाइन (केके रेललाइन) का निर्माण 1967 में ₹55 करोड़ की लागत से जापानी तकनीक के सहयोग से पूरा किया गया था. इसके निर्माण का मकसद रेलवे के जरिए लौह अयस्क का परिवहन करना था.

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